
कतरास : कतरी नदी बचाओ अभियान समिति के अध्यक्ष उमाकांत तिवारी एवं समिति के अन्य सदस्यों ने मेयर संजीव सिंह से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से समिति ने विलुप्त होती कतरी नदी का मुद्दा मेयर के सामने रखा तथा चिंता जताया। समिति के अध्यक्ष उमाकांत तिवारी ने मेयर को बताया कि वर्ष 2023 में कतरी नदी बचाओ अभियान समिति के बैनर तले कई आंदोलन एवं जागरूकता अभियान चलाकर ऐतिहासिक कतरी नदी को बचाने का मुहीम चलाया गया। जागरूकता जगाने के उद्देश्य से 1 वर्षों से अधिक समय तक कतरी नदी के विभिन्न घाटों पर गंगा आरती की गई। स्थानीय नेताओं ग्रामीण एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से जेसीबी लगाकर लिलोरी मंदिर से शमशान घाट तक सफाई भी किया गया।
तत्कालीन उप विकास आयुक्त एवं भारत सरकार के जल सचिव श्री राजीव शर्मा ने कतरी नदी में कुदाल फावड़ा चलकर सफाई हेतु 7 लाख रुपए की फंड मनरेगा के तहत करने का स्वीकृति दिया। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के लापरवाही कारण नदी की सफाई नहीं हो पाई।

अतिक्रमण, अवैध माइंस एवं बीसीसीएल के कारण ऐतिहासिक कतरी नदी का अस्तित्व खतरे में है – उमाकांत तिवारी
उन्होंने मेयर को बताया कि कतरास से सिजुआ अंगार पथरा, कपूरिया, महुदा की लाइफ लाइन कहीं जाने वाली कतरी नदी की स्थिति अत्यंत ही दयनीय है और यदि इसे सुरक्षित करने का प्रयास नहीं किया गया तो आने वाले समय में इसका अस्तित्व मिट जाना सुनिश्चित है। उन्होंने कतरी नदी की दुर्दशा के लिए नदी का अतिक्रमण, अवैध उत्खनन, एवं बीसीसीएल को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने नदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कतरी नदी के तट पर प्रसिद्ध कांको मठ, गंगा गौशाला, प्रमुख पर्यटन स्थल लिलोरी मंदिर कतरास, श्री बुढ़ा बाबा शिव मंदिर झिंझिपहाड़ी, मां तारा मंदिर रामकनाली सलानपुर, पचगढ़ी बाजार का सूर्य मंदिर तथा विख्यात शमशान घाट स्थित है। कतरास का प्रमुख छठ घाट भी इसी कतरी नदी में होता है जिसमें लाखों श्रद्धालुओं का जुटान होता है।
समिति ने लिलोरी मंदिर स्थित श्मशान घाट में इलेक्ट्रॉनिक दाह संस्कार का व्यवस्था करवाने, नदी का साफ सफाई करवाने, गार्डवाल बनवाने एवं चेन पुलिंग चेक डैम सहित कतरी नदी का सौंदर्यीकरण करवाने का आग्रह किया ताकि कतरास की एकमात्र धरोहर कतरी नदी को बचाया जा सके।
