
कतरास: कोयलांचल के ऐतिहासिक कतरास क्षेत्र में शारदीय नवरात्र की महासप्तमी पर शनिवार को परंपरा, आस्था और राजसी वैभव का अनूठा संगम देखने को मिला। पूरा कतरास क्षेत्र सुबह से ही ढाक की थाप, शंख की सुरीली गूंज और घंटियों की पावन ध्वनि से सराबोर हो उठा। इस पावन बेला पर कतरास के सुप्रसिद्ध राजबाड़ी दुर्गा पूजा और जीएनएम हाई स्कूल दुर्गा पूजा पंडाल में पूरे शास्त्रीय विधि-विधान के साथ नवपत्रिका (कोलाबऊ) का आगमन संपन्न हुआ, जिसने संपूर्ण वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।
दुर्गासप्तमी की सुबह ठीक 6 बजे दोनों ही पूजा पंडालों से मां की पवित्र पालकी गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। इस भव्य पालकी यात्रा में पूजा कमेटियों के पदाधिकारियों, सदस्यों, राजपरिवार के सदस्यों के साथ-साथ सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। जीएनएम हाई स्कूल मैदान से निकली यह यात्रा पूजा पंडाल से शुरू होकर भगत सिंह चौक, कतरास नीचे मोड़ और गांधी चौक होते हुए ऐतिहासिक कतरास हटिया स्थित राजा तालाब पहुंची। तालाब घाट पर कतरास के मुख्य पंडित गौतम चक्रवर्ती की देखरेख में अनुष्ठान की शुरुआत हुई। वहां शास्त्रों के अनुसार नवपत्रिका के सभी 9 औषधीय पौधों को एक साथ बांधकर पवित्र स्नान कराया गया। महास्नान के उपरांत नवपत्रिका स्वरूप को पारंपरिक लाल पाड़ की सूती साड़ी (लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी) पहनाकर पूरी निष्ठा के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस पावन विधि के संपन्न होने के बाद मां के इस स्वरूप को पुनः आदरपूर्वक पालकी में बैठाया गया और श्रद्धालु ढाक, घंटी तथा शंख ध्वनि के बीच जयकारे लगाते हुए माता को वापस दुर्गा मंडप लेकर आए, जहां उन्हें स्थापित किया गया।
इस पावन और ऐतिहासिक नवपत्रिका यात्रा का हिस्सा बनने के लिए बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो, वार्ड संख्या एक की पार्षद डॉ. मधुमाला और कतरास के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. स्वतंत्र कुमार सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए। विधायक शत्रुघ्न महतो और पार्षद डॉ. मधुमाला ने मां दुर्गा के दरबार में मत्था टेककर कतरास की सुख, समृद्धि और खुशहाली की मंगल कामना की। साथ ही उन्होंने कतरास में इस वर्ष बनाए गए भव्य और कलात्मक पूजा पंडालों की खुलकर सराहना की और पूजा समिति के सदस्यों की पीठ थपथपाई।
वहीं कतरास राजबाड़ी में आज भी राज परिवार की देखरेख में सदियों पुरानी परंपरा और पूर्ण राजकीय विधि-विधान के साथ यह पूजा संपन्न की जाती है, जो पूरे कोयलांचल में श्रद्धा और आकर्षण का मुख्य केंद्र है। महासप्तमी के इस महापूजन के साथ ही कतरास के तमाम पंडालों के पट आम दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए गए हैं।
