
कतरास: वर्तमान समय में पूरा विश्व अशांति और संघर्ष के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में मानवता को बचाने और शांति स्थापित करने का एकमात्र उपाय आध्यात्म है। उक्त बातें काशी से पधारे कथावाचक कन्हैया द्विवेदी ने कतरास बाजार हटिया स्थित राजस्थानी धर्मशाला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के दौरान कही।
भागवत कथा के क्रम में उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने कलियुग के दोषों को पहचानते हुए लोगों को राम नाम जप के माध्यम से मुक्ति का मार्ग बताया। वहीं सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को भगवान के दर्शन का सरल और सुगम उपाय बताते हुए नाम स्मरण, जप और कीर्तन का महत्व समझाया।
कथावाचक ने कहा कि यह संसार दुखों का घर है और यहां अधिकांश लोग किसी न किसी पीड़ा से ग्रसित हैं। यदि जीवन में वास्तविक सुख और शांति प्राप्त करनी है तो ईर्ष्या, द्वेष और वैमनस्यता का त्याग कर भगवान का स्मरण करना चाहिए। भगवान के नाम का जप और भक्ति ही मनुष्य को मानसिक शांति और आध्यात्मिक आनंद प्रदान करती है।
इससे पूर्व श्रद्धालुओं द्वारा पूजा-अर्चना, हवन एवं महाआरती का आयोजन किया गया। कथा स्थल पर भक्तों की बड़ी संख्या उपस्थित रही।
मौके पर आनंद खंडेलवाल, घनश्याम खंडेलवाल, टिंकू केडिया, लड्डू गोपाल कुलवाल, ओमप्रकाश शर्मा, सुरेश दुबे, नितिन खंडेलवाल, डॉ. एन.के. शर्मा, शशि राजगढ़िया, रामचंद्र रावत सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद थे।
