
कतरास: बाघमारा प्रखंड अंतर्गत झींझीपहाड़ी पंचायत में स्थित तालाब में नहाने के दौरान 14 वर्षीय शीतल कर्मकार की नहाने के दौरान गहरे पानी में डूबने से मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया। पिता लाला कर्मकार एवं अन्य स्थानीय लोगों के अनुसार, शीतल तालाब में नहाने गई थी। इसी दौरान वह गहरे पानी में चली गई और डूब गई। घटना के बाद स्थानीय युवकों ने तालाब के गहरे पानी में उतरकर शीतल को खोजने का काफी प्रयास किया लेकिन उसका शव नहीं निकल पाया। आरोप है कि मौके पर स्थानीय पुलिस भी बहुत देर बाद पहुंची। अंधेरा हो जाने के कारण गोताखोर भी नहीं पहुंच सके।
घटना के अगले दिन शनिवार को गोताखोरों ने काफी मशक्कत के बाद शीतल के शव को गहरे पानी से बरामद किया। शीतल का शव निकलते ही पूरा माहौल गमगीन हो गया और परिजनों में चीख चीत्कार गूंजने लगी।
बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में सरकारी स्तर पर कई तालाबों की सफाई तथा जल संरक्षण के लिए तालाबों की गहराई बढ़ाने का काम कराया गया है। ऐसे में तालाबों के आसपास चेतावनी बोर्ड, सुरक्षित स्नान क्षेत्र, रस्सी, सीढ़ी, लाइफ जैकेट और तत्काल बचाव के लिए जरूरी उपकरणों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पंचायत भवनों में आपदा प्रबंधन किट क्यों नहीं?
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों में किसी आपात स्थिति में तत्काल बचाव के लिए पंचायत स्तर पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है। तालाब में किसी बच्चे या ग्रामीण के डूबने, आग लगने, कुएं में गिरने अथवा किसी अन्य दुर्घटना की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ग्रामीण इलाकों में घटनास्थल से शहरी क्षेत्र के अस्पताल या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम तक पहुंचने में काफी समय लगता है। ऐसे में पंचायत स्तर पर प्राथमिक बचाव उपकरण उपलब्ध रहने से तत्काल राहत कार्य शुरू किया जा सकता है।
