
क्या भ्रष्टाचारियों को बचा रहे हैं जिला शिक्षा पदाधिकारी: मामला सरस्वती शिशु मंदिर श्यामडीह का
कतरास: सरस्वती शिशु मंदिर श्यामडीह में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी, नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा और आरटीई (RTE) के तहत गरीब बच्चों के नामांकन में धांधली की बदबू अब विभागीय गलियारों तक पहुँच चुकी है। आरोप है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) सह जन सूचना पदाधिकारी धनबाद, अभिषेक झा इस कथित भ्रष्टाचार को उजागर होने से बचाने के लिए सूचना अधिकार कानून (RTI) और विभागीय आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानेमाने आरटीआई कार्यकर्ता अरबिन्द सिन्हा ने बताया कि एक शिकायतकर्ता के द्वारा उन्हें सरस्वती शिशु मंदिर श्यामडीह कतरास से जुड़े कई गंभीर गड़बड़ियों की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने 17 मार्च 2026 को एक आरटीआई आवेदन दाखिल कर सरस्वती शिशु मंदिर श्यामडीह स्कूल के संचालन ट्रस्ट के बायोलॉज, सदस्यों की सूची, शिक्षकों-कर्मचारियों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र, नियुक्ति विज्ञापन, ऑडिट रिपोर्ट, ईपीएफ संख्या, वेतन स्लिप, बैंक डिटेल्स, आरटीई लाभार्थियों की सूची और स्कूल बसों द्वारा उपयोग किए गए ईंधन के बिल/वाउचर जैसी कई अहम जानकारियां मांगी थीं।


जिला शिक्षा पदाधिकारी पर विभागीय आदेश और चेतावनी भी बेअसर
प्रशाखा पदाधिकारी सियोन टूटी द्वारा 06 अप्रैल 2026 को सूचना देने का पहला आदेश जारी करने के बावजूद कोई जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद प्रथम अपील (12 मई 2026) के तहत तीन बार अपीलीय सुनवाई (29 जून, 25 जुलाई और 17 अगस्त 2026) आयोजित की गई।
अपीलवाद संख्या- 06/26- डी.एन.बी. की तीसरी सुनवाई (17.08.2026) में जन सूचना अधिकारी सह DEO धनबाद न तो स्वयं उपस्थित हुए और न ही कोई प्रतिवेदन भेजा, जिसे प्रथम अपीलीय अधिकारी (क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक, उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, हजारीबाग) ने अत्यंत खेदजनक और अधिकारों का हनन माना। इसके बाद अपीलीय अधिकारी ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए अविलंब वांछित सूचनाएं साक्ष्य सहित प्रस्तुत करने का अंतिम आदेश दिया और स्पष्ट किया कि भविष्य में सूचना अप्राप्त रहने की स्थिति में सूचना आयोग/न्यायालयी कार्रवाई और जुर्माने की संपूर्ण जवाबदेही जन सूचना अधिकारी की होगी।

भ्रष्टाचार छिपाने और संरक्षण देने का गंभीर आरोप
3 अपीलीय सुनवाइयों और 2 स्पष्ट विभागीय आदेशों के बावजूद सूचना दबाए जाने से यह आशंका पुख्ता हो रही है कि स्कूल में प्राचार्य व सचिव का चयन, स्टाफ नियुक्ति और गाड़ियों के ईधन खर्च के नाम पर लाखों करोड़ों का फर्जीवाड़ा हुआ है। आरटीआई कार्यकर्ता अरबिन्द सिन्हा ने आरोप लगाया है कि धनबाद DEO कार्यालय भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने और दोषियों को बचाने का काम कर रहा है।
अब देखना यह है कि इस अंतिम चेतावनी के बाद भी अगर विभागीय उच्चाधिकारी सुध नहीं लेते हैं, तो क्या यह मामला द्वितीय अपील और राज्य सूचना आयोग/माननीय न्यायालय की चौखट तक पहुँचेगा? अगर ऐसा होता है तो जन सूचना अधिकारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तय मानी जा रही है। वहीं पूरे मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी का पक्ष नहीं मिल सका।
