शिक्षा पर सवाल

स्कूल जाने के रास्ता बना आवारा कुत्तों का बसेरा, धनबाद उपायुक्त से सड़क बनाने की मांग

कतरास : यह बदहाली का नजारा कतरास बाजार वार्ड संख्या एक के राजा तालाब के समीप स्थित पीपल पेड़ के सामने का है। जहां सैकड़ों की आबादी रहती है। तस्वीरें में जिस कचड़ा का ढेर और आवारा कुत्तों का बसेरा को देख रहे हैं, दरअसल वो किसी आवारा पशुओं का बसेरा नहीं बल्कि एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय (प्राथमिक विद्यालय बंग्ला बालक) जाने का रास्ता है। इतना ही नहीं उक्त विद्यालय मतदान केंद्र भी जिसमें नगर निकाय, विधानसभा चुनाव एवं लोकसभा का चुनाव भी होता है।
सवेरे सवेरे जब स्थानीय बच्चे शिक्षा के मंदिर में प्रवेश करने जाते हैं तो सबसे पहले बच्चों को कचड़ों में कदम रखना पड़ता है। उसके बाद ही बच्चे शिक्षा के मंदिर में कदम रखते हैं। हालांकि यह कोई नई बात नहीं है बल्कि दशकों से यही स्थिति है। यह दुर्भाग्य ही है कि अलग झारखंड बनने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। ऐसे में कैसे शिक्षित होगा हमारा नौनीहाल और कैसे शिक्षित होगा हमारा झारखंड।
बार बार उठी सड़क बनाने की मांग, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने हमेशा किया नजरअंदाज
स्थानीय लोगों ने विद्यालय जाने के लिए जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के समक्ष बार-बार सड़क बनाने की मांग की। लेकिन जनप्रतिनिधियों ने हर बार इस मांग को नजरअंदाज किया। चुनाव से पहले वे वादा तो करते हैं लेकिन चुनाव के बाद वादे को भूल जाते हैं। इस बूथ में लगभग 15 सौ वोटर है। जो किसी भी जनप्रतिनिधि के जीत हार में बड़ा अंतर साबित कर सकतेहै।

लोकसभा, विधानसभा के बाद अब नगर निकाय चुनाव, जीतने वाले पार्षद से बढ़ी उम्मीदें
बदहाल और तंग रास्ते में सड़क निर्माण की उम्मीद करते हुए कई लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव बीत चुके हैं। दो बार नगर निगम चुनाव भी संपन्न हो चुके हैं। 10 वर्षों के अंतराल के बाद एक बार फिर नगर निगम चुनाव होने जा रहा है। जिसकी अधिसूचना निर्वाचन आयोग ने जारी कर दी है। 23 फरवरी को चुनाव संपन्न होंगे जबकि 27 फरवरी को प्रत्येक वार्ड का अपना पार्षद होगा और धनबाद नगर निगम को एक मेयर मिलेगा। जीते हुए पार्षद और मेयर से लोगों को कई उम्मीदें होगी। वार्ड संख्या एक स्थित इस बस्ती को भी अपने जीते हुए पार्षद से उन तमाम चीजों की उम्मीदें होगी इसके लिए अब तक वे वंचित है। इस मोहल्ले में स्कूल जाने के लिए उक्त सड़क के अलावा लोगों ने आम सड़क तथा स्ट्रीट लाइट की मांग की है।

शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार चला रही है कई योजनाएं
शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए झारखंड सरकार कई योजनाओं को चल रही है। लेकिन कुर्सी पर बैठे जिम्मेदार सरकारी सेवकों एवं जनप्रतिनिधियों को शिक्षा से कोई सरोकार नहीं है। शिक्षा विभाग के अधिकारी एक बार भी सरकारी स्कूलों की दुर्दशा देखने नहीं आते हैं। अधिकांश सरकारी अधिकारियों के खुद के बच्चे सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ते हैं। शायद इसलिए सरकारी स्कूलों की दुर्दशा को दूर करना वे जरूरी नहीं समझते हैं। हालांकि धनबाद के वर्तमान उपायुक्त आदित्य रंजन सरकारी स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों को दुरुस्त करने में लगातार प्रयासरत है। स्थानीय लोगों ने संपूर्ण भारत अखबार के माध्यम से धनबाद उपायुक्त को इस मामले में पहल कर बच्चों के आवागमन के लिए सड़क बनाने का मांग किया है।
