

कतरास/धनबाद : धनबाद नगर निगम अंतर्गत वार्ड सँख्या 01 के मतदान केंद्र सँख्या 200 (राजा तालाब के किनारे) में बीएलओ के पास इलेक्शन कमीशन के द्वारा जो मतदाता सूची(वोटर लिस्ट) उपलब्ध कराया गया है उसमें मतदाताओं की सँख्या- 1486 तक था जबकि पोलिंग अफसर व पोलिंग एजेंट के पास जो मतदाता सूची था उसमें मतदाताओं की सँख्या-1428 तक ही था।
ऐसे में 1428 सीरियल नम्बर के बाद का जो भी मतदाता वोट देने आया पोलिंग अफसर के द्वारा उसे वोट देने की अनुमति नही दी गई। इस कारण कुछ मतदाताओं का पोलिंग अफसरों से तू तू मैं मैं भी हुआ। अंततः ऐसे मतदाताओं को बिना मतदान किये ही वापस लौटना पड़ा।

खुशी कुमारी, दिनेश शाह, प्रेम महतो, जूही परवीन सहित दर्जनों मतदाता नही दे सके वोट, निर्वाचन आयोग पर लगाया लापरवाही का आरोप
खुशी कुमारी सीरियल नंबर 1450, दिनेश शाह सीरियल नंबर 1432, प्रेम महतो सीरियल नंबर 1438, जूही परवीन सीरियल नम्बर 1479 सहित दर्जनों मतदाता बिना मतदान किया ही मतदान केंद्र से वापस चले गए मतदाताओं में गहरी नाराजगी देखी गई इन मतदाताओं ने कहा कि लंबी लाइनों में लगकर अपनी बारी का इंतजार किया और जब बारी आई तो वोट देने से वंचित कर दिया गया। जबकि हमलोगों के पास वोटर कार्ड भी है और इससे पहले विधानसभा चुनाव में मतदान भी कर चुके हैं। पोलिंग अफसर के द्वारा बोला जा रहा है कि इलेक्शन कमीशन के द्वारा उन्हें 1428 बैलट पेपर ही उपलब्ध कराया गया है। यहां तक की पोलिंग एजेंट के पास भी वोटर लिस्ट में 1428 मतदाताओं की सूची ही उपलब्ध है। ऐसे में जिसका सीरियल नम्बर 1428 से अधिक है उन्हें वोट देने नहीं दिया जा सकता है। लेकिन सवाल है कि बीएलओ के पास 1486 मतदाताओं की सूची कैसे है। बीएलओ को भी तो मतदाता सूची इलेक्शन कमीशन ने ही उपलब्ध कराया है। मतदाताओं ने इलेक्शन कमीशन तथा बीएलओ पर लापरवाही का आरोप लगाया।

पोलिंग अफसर एवं मजिस्ट्रेट ने नहीं दिया पत्रकार के सवाल का जवाब
इस संबंध में पोलिंग अफसर व नियुक्त मजिस्ट्रेट रोहित कुमार से एक पत्रकार ने पूछा कि बीएलओ के पास उपलब्ध वोटर लिस्ट एवं पोलिंग अधिकारी के पास उपलब्ध वोटर लिस्ट में अंतर कैसे हो गया एवं सीरियल नंबर 1428 के बाद के मतदाताओं को वोट देने से वंचित क्यों किया जा रहा है? तो पोलिंग अधिकारी एवं नियुक्त मजिस्ट्रेट ने कैमरे पर कुछ भी कहने से साफ साफ मना कर दिया। वही सवाल का जवाब देने के बजाय मजिस्ट्रेट रोहित कुमार पत्रकार की नजर से बचते हुए मौके से निकल गए।

58 मतदाता वोट देने के अधिकार से रहे वंचित, जिम्मेदार कौन?
सवाल उठता है कि क्या मतदाताओं के वोट की कीमत कुछ भी नहीं? लोकतांत्र में एक एक वोट की कीमती होता है। लेकिन यहां तो पूरे 58 मतदाताओं को उनके सबसे बड़े अधिकार से वंचित कर दिया गया क्या शहर की सरकार चुनने का हक इन 58 मतदाताओं को नहीं है? आखिर यह लापरवाही किसकी है? एक जीवित व्यक्ति अपने आधार कार्ड लेकर लंबी लाइनों में घंटे खड़े रहकर वोट देने के लिए अपनी बारी का इंतजार करता है और जब वोट देने की बारी आती है तो उसे कहा जाता है की पोलिंग अफसर की वोटिंग लिस्ट में तुम्हारा नाम नहीं है। लेकिन लंबी लाइनों में खड़े रहकर पोलिंग अफसर तक पहुंचने वाला वह शख्स इसी बूथ का मतदाता है और पहले भी सरकार चुनने में अपनी मतों का प्रयोग कर चुका है। फिर आज यदि उसका नाम पोलिंग अफसर के वोटर लिस्ट में नहीं है तो इसका जिम्मेदार कौन है? क्या ऐसे जिम्मेदार कर्मियों या अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? आम लोगों का कहना है कि यह बहुत ही गंभीर मामला है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को इस मामले में संज्ञान लेकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
