
कतरास: बाघमारा प्रखंड अंतर्गत दरीदा मोजा स्थित सिनवारटांड़ की बड़ी बाउंड्रीवाल को लेकर जमीन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को दरीदा और मुराईडीह बस्ती के लगभग दो दर्जन ग्रामीणों ने बाउंड्रीवाल के अंदर पहुंचकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो पर जबरन जमीन कब्जा करने का आरोप लगाया।
ग्रामीणों ने कहा कि लगभग दो सौ एकड़ के बड़े भूखंड पर जबरन कब्जा कर बड़ी बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी गई है। साथ ही सरकारी व मुखिया फंड से बने ग्रामीण मार्ग पर सेंट्रल जेल से भी बड़ा गेट लगाकर आवागमन बाधित कर दिया गया है। इससे ग्रामीणों को अपने खेतों तक आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि करीब तीन वर्ष पूर्व बाघमारा अंचल के कर्मचारी और अमीन द्वारा जमीन की मापी की गई थी, जिसमें 16 एकड़ 50 डिसमिल जमीन को सरकारी बताया गया था। उस समय चेतावनी बोर्ड भी लगाया गया था कि इस जमीन की खरीद-बिक्री करना कानूनन अपराध है। हालांकि बोर्ड लगाए जाने के कुछ ही घंटों के भीतर उसे उखाड़कर फेंक दिया गया।
मुराईडीह बस्ती निवासी अमित महतो ने बताया कि बाउंड्रीवाल के अंदर उनकी खेतिहर जमीन भी आती है। वर्ष 2017-18 से इस जमीन पर जेलनुमा बाउंड्रीवाल का निर्माण शुरू हुआ, जिसके बाद से वे अपनी जमीन पर खेती नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब से बाउंड्रीवाल का निर्माण शुरू हुआ, तब से ग्रामीण चरणबद्ध आंदोलन करते आ रहे हैं।
प्रखंड कार्यालय, जिला मुख्यालय में कर चुके हैं प्रदर्शन, विधानसभा में किया है अर्धनग्न प्रदर्शन
ग्रामीणों के अनुसार वे बाघमारा प्रखंड कार्यालय के समक्ष 69 दिनों तक धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। इसके अलावा जिला मुख्यालय में भी प्रदर्शन किया गया और रांची में राज्यसभा व विधानसभा के समक्ष अर्धनग्न प्रदर्शन तक किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि अब फिर से नए सिरे से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा, ताकि सरकार की “कुंभकर्णी नींद” टूट सके।
सीनवाटांड़ के ग्रामीणों ने अपनी जमीन बचाने के लिए जिला प्रशासन और विधायक सरयू राय से भी गुहार लगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि जबरन कब्जा की गई जमीन को मुक्त कराने के लिए विधायक सरयू राय उनका साथ देंगे।
दरीदा बस्ती निवासी शिक्षक नंदलाल मांझी ने बताया कि इस जमीन पर पहले रहर और तिसी की खेती होती थी और अच्छी पैदावार होती थी। उनका कहना है कि बाउंड्रीवाल के अंदर झारखंड सरकार, बीसीसीएल और आसपास के ग्रामीणों की भी जमीन शामिल है।
इस संबंध में ढुलू महतो का पक्ष नही मिल सका है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित महतो, सदानंद राय, नंदलाल मांझी, धनेश्वर महतो, बासु राय, बैजू राय, सनोज राय, मोटी राय, काली राय, खलील अंसारी, मंजूर अंसारी, सैयाद अंसारी, मोइनुद्दीन अंसारी, बिजेंद्र महतो, नागेश्वर राय, नुनीबाला, कलावती, मीना, ऋणा, चम्पा देवी सहित कई अन्य ग्रामीण मौजूद थे।
