
कतरास : कतरी नदी में अवैध रूप से बनाए गए अस्थायी पुल और नदी क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर रविवार को विधायक सरयू राय ने अंगारपथरा ओपी क्षेत्र अंतर्गत ग़जलीटांड़ स्थित कतरी नदी का निरीक्षण किया था। अवैध रूप से बनाए गए पुल के मामले को विधानसभा में गंभीरता से उठाए जाने की बात करने के बाद बीसीसीएल प्रबंधन की नींद खुली और आनन फानन में मंगलवार को बीसीसीएल प्रबंधन ने कार्रवाई करते हुए नदी में बनाए गए एक अस्थायी पुल को खुद से ध्वस्त कर दिया और नदी में डाले गए पाइप और ओबी (ओवरबर्डन) को हटाने का कार्य शुरू कराया।

ज्ञात हो कि रविवार को जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने गजलीटांड़ स्थित कतरी नदी का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया था कि कतरी नदी में एक स्थान पर आरके माइनिंग ट्रांसपोर्ट कंपनी ने सीमेंटेड पाइप डालकर एवं दूसरे स्थान पर डेको कंपनी के द्वारा कतरी नदी में छह बड़े पीपा पाइप डालकर अस्थायी पुल का निर्माण किया गया है, जिसका उपयोग भारी वाहनों की आवाजाही के लिए किया जा रहा था। इस पुल के माध्यम से एक छोर से दूसरे छोर तक ओबी ले जाने का कार्य किया जा रहा था।
निरीक्षण के दौरान विधायक ने इसे पर्यावरण और स्थानीय जनजीवन के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा था कि नदी की प्राकृतिक धारा को बाधित करना कानूनन गलत है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इस मामले को आगामी विधानसभा सत्र एवं समिति की बैठक में प्रमुखता से उठाया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया जाएगा। उनकी चेतावानी के बाद डेको कंपनी प्रबंधन ने अवैध पुल को स्वयं ही ध्वस्त कर दिया जबकि आर के माइनिंग ट्रांसपोर्ट कंपनी प्रबंधन द्वारा बनाया गये पुल में अब भी भारी वाहनों की ट्रांसपोर्टिंग जारी है।

अवैध पुल निर्माण करने वालों पर मुकदमा दायर होना चाहिए – विजय कुमार झा
मामले को लेकर बियाडा के पूर्व अध्यक्ष विजय कुमार झा ने कहा कि विधायक सरयू राय के निरीक्षण के बाद डेको कंपनी प्रबंधन के द्वारा खुद से पुल को तोड़ना यह जाहिर करता है कि कंपनी प्रबंधन के द्वारा अवैध रूप से पुल का निर्माण किया गया था। कंपनी प्रबंधन के द्वारा नदी के धारा को अवरुद्ध करके प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर पुल का निर्माण कराया गया। यह किसी भी स्थिति में क्षमा योग्य नहीं है। अवैध पुल का निर्माण करने वालों पर प्राथमिकी दर्ज होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक और पुल अवैध रूप से बना हुआ है जिसे अब तक तोड़ा नहीं गया है। अगर उसे जल्द ही नहीं तोड़ा जाता है तो मामले की शिकायत एनजीटी से की जाएगी।

एक अवैध पुल को तोड़ना जबकि दूसरे से अब भी ट्रांसपोर्टिंग जारी रखना यह बात कुछ हजम नहीं हो रही है। क्या यह दिखावे की कार्रवाई है या फिर कानूनी दांव पेंच से बचने का पैंतरा है। सवाल उठता है की कतरी नदी में पुल बनाकर प्रकृति को नुकसान पहुंचाने का जो कृत्य किया गया है उसका जिम्मेदार कौन है? क्या प्रशासन और सरकार इस पर संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करेगी या फिर अन्य मामलों की तरह यह मामला भी ठंडा बस्ता में चला जाएगा?
