
कतरास: धनबाद के कोयलांचल क्षेत्र में अवैध खनन का काला कारोबार किस कदर पैर पसार चुका है और इसके खिलाफ आवाज उठाने वालों की क्या दुर्गति होती है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद 16 नंबर में देखने को मिला है। कटहलधोडा में चल रहे कथित अवैध कोयला खनन के खिलाफ जब जनता के चुने हुए वार्ड संख्या 5 के पार्षद और स्थानीय लोग खड़े हुए, तो तस्करों पर कार्रवाई करने के बजाय फरियादी पर ही केस दर्ज कर दिया गया। कोयला चोरी और दबंगई के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत वार्ड संख्या-5 की पार्षद निरुपमा देवी, कांग्रेस नेता अशोक लाला और मनोज प्रजापति समेत कई लोगों को नामजद प्राथमिकी (FIR) के रूप में चुकानी पड़ी है, जो प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर गहरे सवाल उठाता है।
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब पार्षद निरुपमा देवी ग्रामीणों और सीआईएसएफ (CISF) के जवानों के साथ अवैध खनन स्थल का मुआयना कराने पहुंची थीं। आरोप है कि सीआईएसएफ जवानों के वहां से हटते ही अवैध खनन में लिप्त असमाजिक तत्वों ने पार्षद और उनके सहयोगियों पर हमला कर दिया। लाठी-डंडों से मारपीट की गई और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उनके देवर चंदन पासवान को निशाना बनाया गया। इस घटना के संबंध में निरुपमा देवी ने चंदन चौहान और गौतम चौहान के खिलाफ कतरास थाने में शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, इस मामले के तुरंत बाद ही काउंटर केस के रूप में रूबी देवी नामक महिला की ओर से चंदन पासवान पर शौच के दौरान वीडियो बनाने और अभद्र व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाते हुए दूसरी प्राथमिकी दर्ज करा दी गई, जिसे ग्रामीण विरोध की आवाज को दबाने की सोची-समझी साजिश बता रहे हैं।
प्रशासनिक संवेदनहीनता की हद तब पार हो गई जब पीड़ित पार्षद मारपीट और अवैध खनन की शिकायत लेकर थाने पहुंचीं। आरोप है कि न्याय दिलाने के बजाय थाना प्रभारी ने उल्टे जनप्रतिनिधि पर ही तस्करों से रंगदारी मांगने की बात कहकर अपमानित किया। इस अमर्यादित व्यवहार और पुलिसिया रवैये से आक्रोशित होकर लकड़का के ग्रामीण और स्थानीय जनप्रतिनिधि कतरास थाना मोड़ पर धरने पर बैठ गए, जिससे सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। निष्पक्ष जांच और समाधान निकालने के बजाय कतरास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के नाम पर सड़क जाम करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए पार्षद निरुपमा देवी, कांग्रेस नेता अशोक प्रकाश लाल, मनोज प्रजापति तथा अन्य ग्रामीणों पर तीसरी प्राथमिकी दर्ज कर दी।
एक तरफ जहां कोयलांचल में आए दिन अवैध खनन के कारण भू-धंसान हो रहे हैं और बेकसूरों की जानें जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अवैध कारोबार पर लगाम कसने के बजाय शिकायत लेकर पहुंचे जनप्रतिनिधियों को ही कटघरे में खड़ा कर देना कतरास पुलिस की कार्यशैली और निष्पक्षता पर गंभीर दाग लगाता है। जनता सवाल पूछ रही है कि क्या कानून का राज केवल आवाज उठाने वालों को दबाने के लिए रह गया है? अब देखना है कि मामले में आगे क्या कुछ होता है…
