भुवनेश्वर(ओडिसा): ओडिशा राजस्व बोर्ड ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर की करीब 57 एकड़ मूल्यवान भूमि को दोबारा मंदिर के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है। इस भूमि की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 300 करोड़ रुपये बताई जा रही है। खुर्दा जिले के जटनी तहसील के कुड़ियारी मौजा स्थित यह जमीन वर्ष 1961 में औद्योगिक विकास के लिए एक निजी कंपनी को लीज पर दी गई थी, लेकिन इस मामले को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था।
राजस्व बोर्ड के सदस्य सत्यव्रत साहू की अध्यक्षता वाली अदालत ने दो पुनरीक्षण याचिकाओं को स्वीकार करते हुए वर्ष 1961 की लीज को अवैध घोषित कर दिया। अदालत ने कहा कि यह लीज ओडिशा हिंदू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1951 की धारा-19 का उल्लंघन करते हुए दी गई थी, क्योंकि इसके लिए एंडोमेंट कमिश्नर की पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। अदालत ने जटनी तहसीलदार को निर्देश दिया है कि रिकॉर्ड ऑफ राइट्स में संशोधन कर भूमि को भगवान जगन्नाथ, पुरी के नाम दर्ज किया जाए।
जांच में यह भी सामने आया कि जिस निजी कंपनी को उद्योग स्थापित करने के उद्देश्य से जमीन लीज पर दी गई थी, उसने वहां कभी कोई उद्योग स्थापित नहीं किया। मंदिर को भी इस भूमि से कोई आर्थिक लाभ नहीं मिला और जमीन आज तक खाली पड़ी रही। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी अवैध लेन-देन के आधार पर रिकॉर्ड ऑफ राइट्स तैयार हुआ है तो उसमें संशोधन किया जा सकता है। साथ ही भूमि को राजस्व अभिलेखों में ‘अनाबादी-पुरातन पतित’ श्रेणी में दर्ज करने का निर्देश भी दिया गया है। इस फैसले को श्री जगन्नाथ मंदिर की संपत्तियों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।