
धनबाद : धनबाद का सियासी पारा धीरे-धीरे चढ़ता ही जा रहा है। नगर निगम चुनाव के सभी मेयर और पार्षद चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की फाइनल सूची जारी हो चुकी। इस पूरे क्रम में सबसे अधिक चर्चा का विषय मेयर चुनाव और मेयर प्रत्याशियों को लेकर बना हुआ है। शुक्रवार तक आम जनता और समर्थकों में अपने अपने प्रत्याशियों को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई थी जो अब स्पष्ट हो चुकी है। सबसे अधिक चर्चा भाजपा के बागी नेताओं को लेकर बन रहा है। बता दें कि मेयर पद के लिए अंतिम नाम वापसी के दिन भी भाजपा से झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह ने अपना नाम वापस नहीं लेकर चुनावी मैदान में डटे रहने का ऐलान कर दिया है। भाजपा नेता मुकेश पांडे और भृगुनाथ भगत जैसे बड़े नाम भी चुनावी मैदान में पूरी ताकत से डटे हुए हैं। जबकि झामुमो की नीलम मिश्रा ने नामांकन वापस ले लिया है। जिससे शेखर अग्रवाल झामुमो समर्थित अकेले उम्मीदवार बन गए हैं। अब मेयर पद के लिए कुल 29 उम्मीदवार मैदान में बने हुए हैं।
शनिवार को मिलेगा चुनाव चिन्ह
भाजपा की ओर से बागी उम्मीदवारों को मनाने की कवायद तेज हो गई है, लेकिन अभी तक किसी भी बागी ने नाम वापस लेकर पार्टी लाइन में आने से इंकार किया है। इस तरह चुनाव अब और भी रोचक होता जा रहा है। अब देखना यह भी है कि अगर बागी प्रत्याशी पार्टी का बात नहीं मानते हैं तो पार्टी की ओर से क्या कदम उठाया जाएगा। सवाल ये भी है कि पार्टी जो भी कदम उठाएगी उससे पार्टी और पार्टी समर्थित प्रत्याशी पर कितना प्रभाव पड़ेगा।
शनिवार को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे, जिसके बाद प्रचार का आखिरी दौर शुरू होगा। धनबाद की राजनीति में इस बार बागी तेवर और नई रणनीतियों के साथ आमने-सामने होंगे। जनता की नजरें इस मुकाबले पर टिकी हैं, जहां हर उम्मीदवार अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी तैयारी में है। धनबाद के मेयर चुनाव इस बार न सिर्फ राजनीतिक दलों के लिए, बल्कि क्षेत्र की जनता के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होंगे, क्योंकि यह चुनाव धनबाद में विकास की दिशा और दशा तय करेगा।
