
कतरास: शारदीय या चैत्र नवरात्रि के छठे दिन अर्थात षष्ठी को भोग, आरती, मंत्र एवं चालीसा के साथ विधि विधान से राजबाड़ी कतरास में माता कात्यायनी की पूजा की गई। संध्या आरती में मंगलाआरती की टीम ने हिस्सा लिया। टीम के सदस्यों ने मंगला आरती में ऐसा भक्ति का समां बांधा कि लोग मंत्रमुग्ध हो गए। पुजारी रिंटू बनर्जी, मणिकांत सहाय, सोनू चौरसिया, सुरेश दुबे एवं बचन शर्मा ने संध्या आरती में एक से बढ़कर एक भजनों एवं आरती की प्रस्तुति की। इस दौरान सैकड़ो भक्त आरती में शामिल हुए एवं हाथ जोड़कर देवीय शक्ति को स्मरण कर आनंद लेते रहे।


बता दे कि माता कात्यायनी को छठ माता भी कहा जाता है। मां कात्यायिनी की चार भुजाएं हैं। दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। मां के बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार है व नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। इनका वाहन सिंह है।
ग्रंथों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि महर्षि कात्यायन ने भगवती की कठिन तपस्या की थी और इच्छा जताई थी कि मां उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहाँ जन्म लिया, इसलिए उनका नाम ‘कात्यायनी’ पड़ा। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। इस देवी की उपासना करने वाले भक्तों के रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इसलिए कहा जाता है कि इस देवी की उपासना करने से परम पद की प्राप्ति होती है। माँ कात्यायनी, देवी दुर्गा के नौ रूपों (नवदुर्गा) में छठी देवी हैं। इनकी पूजा विशेष रूप से नवरात्रि के छठे दिन की जाती है। माँ कात्यायनी को साहस, वीरता और मनोवांछित वर प्रदान करने वाली देवी माना जाता है।
