
कतरास: कतरास के भटमुरना मौजा में जमीन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को एक पक्ष के रामेश्वर हजारी के वंशजों ने प्रेस वार्ता कर विवादित जमीन में अपना हक अधिकार और दावा किया तो वहीं गुरुवार को दूसरे पक्ष के मुरलीधर हजारी के वंशज हीरालाल हजारी, रामचंद्र हजारी, जीतू हजारी, कन्हाई हजारी, ब्रजेश हजारी, नरेश हजारी, गौतम हजारी, मुकेश हजारी, सूरज हजारी, पवन हजारी, बजरंगी हजारी, डुग्गू हजारी एवं मोहन हजारी के वंशज आनंद राम हजारी, संध्या देवी, अवध हजारी, चंद्रशेखर हजारी, अभिषेक हजारी आदि ने प्रथम पक्ष के दावों का पूरी तरह से खंडन करते हुए कहा कि उक्त विवादित जमीन पर प्रथम पक्ष का कोई हक अधिकार नहीं बनता है।

मुरलीधर हजारी के वंशज हीरालाल हजारी, गौतम हजारी एवं अन्य ने दावा कि भटमुरना मौजा के पुराना खाता संख्या-12 (नया 23), पुराना प्लॉट संख्या-9 (नया 11) और पुराना प्लॉट संख्या-10 (नया 12) की कुल 23 डिसमिल भूमि उनके पूर्वज मुरलीधर हजारी, भिखु हजारी और हलधर हजारी की निजी रैयती जमीन है। उन्होंने दावा किया कि इस जमीन के पुराने खतियान और वर्ष 2011 तक की ऑफलाइन रसीद भी उनके पास उपलब्ध है। रैयतों का कहना है कि सर्वे के दौरान गलती से नए खतियान में उनलोगों का नाम दर्ज हो गया, इसी आधार पर रामेश्वर हजारी के वंशज इस जमीन पर दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि दूसरा पक्ष जमीन पर अपना अधिकार बताता है तो उसे पुराने राजस्व रिकॉर्ड और ऑफलाइन रसीद भी प्रस्तुत करनी चाहिए।
रामेश्वर हजारी के वंश अपने हिस्से की जमीन बेचकर हमारे हिस्से की जमीन हड़पना चाहते हैं, प्रेस वार्ता में बोले हीरालाल हजारी
प्रेस वार्ता में यह भी आरोप लगाया गया कि खाता संख्या-12 के ही एक अन्य प्लॉट की 28 डिसमिल इजमाली (साझा) जमीन को कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचा गया और अब उसे दोबारा बेचने की तैयारी की जा रही है। रैयतों ने बताया कि इस मामले को लेकर न्यायालय में वाद लंबित है और उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के तहत अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे है। रैयतों ने यह भी आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष द्वारा पहले अपनी हिस्से की जमीन बीसीसीएल को देकर कुछ नौकरी ले चुके हैं और शेष भूमि बेच चुके है। अब उनकी निजी जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करना चाहते हैं। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी कतरास थाना को दे दी है। जरूरत पड़ने पर अंचल कार्यालय बाघमारा और उपायुक्त कार्यालय धनबाद में भी लिखित शिकायत कर न्याय की गुहार लगाएंगे।
