
कतरास: इसे पुलिस सिस्टम की लापरवाही कहेंगे या कोई अनहोनी कि थाना में रखे रखे कोई जब्त बाइक अचानक से गायब हो जाती है। मामला राजगंज थाना क्षेत्र का है, जहां सड़क दुर्घटना के बाद जब्त की गई एक बाइक रहस्यमय तरीके से राजगंज थाना परिसर से गायब हो जाती है।

घटना के पीड़ित बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के बृजपुर मंडलाडीह निवासी मटन प्रसाद महतो जो कि DGMS संस्थान में निजी सहायक के पद पर कार्यरत हैं, ने इस मामले को लेकर ग्रामीण एसपी कपिल चौधरी से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित के अनुसार, 21 जुलाई 2025 को खरनी मोड़ के पास एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी थी, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने उनकी बाइक (संख्या JH 10 CE 5021) और ट्रैक्टर को जब्त कर राजगंज थाना ले जाने की बात कही थी तथा इस संबंध में कांड संख्या 71/2025 दर्ज किया गया था। दुर्घटना के बाद मटन प्रसाद महतो का इलाज करीब आठ महीने तक धनबाद और कोलकाता में चला, जिसके बाद स्वस्थ होने पर जब वे अपनी बाइक लेने थाना पहुंचे, तो वहां उनकी बाइक मौजूद नहीं थी।
पीड़ित का आरोप है कि शुरुआत में पुलिस ने साफ तौर पर बाइक के थाना में होने से ही इनकार कर दिया, जिससे उन्हें काफी आश्चर्य हुआ। जब वे अपनी बाइक की मांग पर अड़े रहे, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें हैरान करने वाला प्रस्ताव देते हुए कहा कि वे थाना परिसर में खड़ी किसी दूसरी बाइक को ले जाएं। इस पर मटन प्रसाद महतो ने सख्त आपत्ति जताते हुए दूसरी बाइक लेने से इनकार कर दिया और अपनी ही बाइक की मांग दोहराई।

ऐसा कोई मामला नही है, बाइक गायब होने का आरोप गलत है- राजगंज थाना प्रभारी
मामले को लेकर जब राजगंज थाना प्रभारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसा कोई मामला नही है। थाना परिसर से बाइक चोरी होने का आरोप गलत है। अब सवाल उठता है कि यदि राजगंज थाना परिसर से बाइक चोरी नही हुआ है तो पीड़ित ने ग्रामीण एसपी से बाइक चोरी का झूठा शिकायत क्यों किया ? और यदि पीड़ित का आरोप सही है तो थाना प्रभारी अलीशा कुमारी ने बाइक चोरी होने की बात स्वीकार क्यो नही की। अब सवाल है कि दोनों में से झूठ कौन और क्यों बोल रहा है? यदि थाना से बाइक गायब हुई है तो वो बाइक अभी कहां है? इस घटना पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं जिसका जवाब जांच में ही मिल सकेगा।

इधर पीड़ित ने ग्रामीण एसपी से लिखित शिकायत कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अपनी बाइक की बरामदगी की मांग की है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करती है! जिला प्रशासन की जांच में पीड़ित का आरोप सही पाया जाता है या थाना प्रभारी का । इस मामले का जांच होना इसलिए आवश्यक है क्योंकि मामला सिर्फ एक बाइक के गायब होने का नहीं है, बल्कि आम जनता के पुलिस पर भरोसे से भी जुड़ा हुआ है।
