कतरास: कतरास राजबाड़ी में सिंदूर खेला एवं नव पत्रिका विसर्जन के साथ श्री श्री चैती दुर्गा पूजा का भव्य रूप से समापन हो गया। अहले सुबह विधि विधान से विजयदशमी पूजन किया गया। इसके बाद हर वर्ष की भांति सुबह 9 बजे से ऐतिहासिक सिंदूर खेला शुरू हुआ। महिलाओं ने एक दूसरे के मांग में सिंदूर भरकर एक दूसरे को सुहागिन बने रहने की कामना की। मंदिर परिसर में ही घंटों तक सिंदूर खेला खेलने के बाद लगभग 10:30 बजे (माता को पालकी में विराजमान कर) पूरे विधि विधान से राजबाड़ी परिसर से नवपत्रिका लेकर भव्य रूप से कलश सह शोभा यात्रा निकाला गया।


पश्चिम बंगाल का प्रसिद्ध ढाक शोभा यात्रा में बना रहा आकर्षण का केंद्र बिंदु
शोभा यात्रा में पश्चिम बंगाल के ढाक नृत्य मुख्य रूप से आकर्षण का विशेष केंद्र बना रहा। ढाक के ताल पर हजारों महिलाएं नाचते गाते आगे बढ़ रही थी। काफिला जैसे जैसे आगे बढ़ता जा रहा था, भीड़ भी वैसे ही बढ़ते जा रही थी। पूरे शोभा यात्रा के दौरान स्थानीय लोग काफिला पर पुष्प वर्षा करते रहे ।

लगभग आधा दर्जन स्थानों में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के द्वारा शीतल पेयजल, फ्रूटी एवं बिस्किट की व्यवस्था की गई थी।


शोभा यात्रा राजबाड़ी रोड से निकलकर मैरा टोला, गणेश मंदिर, गांधी चौक होते हुए कतरास बाजार हटिया स्थित राजा तालाब के घाट पर पहुंचा, जहां मुख्य पुरोहित गौतम चक्रवर्ती एवं अन्य पुरोहितों के द्वारा पूरे विधि विधान से एवं नम आंखों से नव पत्रिका का विधिवत रूप से विसर्जन किया गया गया।

इस मौके पर महिलाओं ने सिंदूर खेलते हुए जमकर नृत्य किया। ढाक की ताल और ढोल नगाड़ों की गूंज से पूरा कतरास भक्तिमय हो गया। इसके बाद शोभा यात्रा कतरास बाजार गांधी चौक होते हुए रजवाड़ी स्थित पूजा स्थल लौट आया दोपहर में महा भंडारा का आयोजन किया गया जिसमें भारी संख्या में महिला पुरुष श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

सिंदूर खेला में पहुंची जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह को समिति ने चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया
इस मौके पर जिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती शारदा सिंह भी उपस्थित हुई। मंदिर समिति के महिला सदस्यों के द्वारा चुनरी ओढ़ाकर शारदा सिंह का स्वागत किया गया। महिलाओं के साथ शारदा सिंह भी सिंदूर खेला में शामिल हुई।

इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में पूजा समिति के अध्यक्ष बिरेन दा, कोषाध्यक्ष गणेश मोदक, सचिव समीर चक्रवर्ती, सह सचिव राखोहरि पटवा, मीडिया प्रभारी अरबिन्द सिन्हा, श्रीकांत चटर्जी, पंकज सोनार, रिंटू बनर्जी, सच्चिदानंद उपाध्याय, चंदन दा,आशीष चटर्जी, राजू दे, विष्णु अग्रवाल, तपन घोषाल, मधुसूदन दा, दिगु हलदार, बबलू चंद्र, नेपाल चटर्जी, गोलू हलदार, जय चटर्जी, सिकंदर चक्रवर्ती, मनीष पटवा, पप्पू लोहार, विनय बनर्जी, सुरेंद्र रवानी, सौरभ पटवा, लखीकांत दा, रॉबिन पटवा, विजय मोदक, रजत मोदक, रिंकू बाऊरी, राजा मुखर्जी, सरोज दे, अमित राणा, संजय स्वर्णकार एवं अन्य कई लोगों का सहयोग रहा।
