
कतरास: “मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती, मेरे देश की धरती…….” “उपकार” फिल्म के गाने की यह पंक्तियां लगभग हर किसी ने सुनी होगी और हर किसी को अपने भारत की माटी पर फक्र होता होगा। फक्र इसलिए कि हमारे देश की माटी फसल के रूप में सोना, चांदी और हीरा मोती पैदा करती है। लेकिन अभी आप जो वीडियो और तस्वीरें देख रहे हैं ये माटी की नहीं बल्कि धनबाद जिले के बाघमारा विधानसभा अंतर्गत बाघमारा थाना क्षेत्र के जमुनिया नदी की है। जिसकी कोख में फसल नहीं बल्कि काले हीरे (कोयला) की खेती की जा रही है।
तस्करों ने नदी में बनाया सुरंग, जान जोखिम में डालकर हर रोज निकाल रहे है सैकड़ो टन कोयला

बताते चलें कि एक बार फिर से बाघमारा पुलिस अनुमंडल क्षेत्र अंतर्गत बाघमारा थाना चर्च में है। कोयला माफियाओं और कोयला तस्करों ने बाघमारा थाना क्षेत्र अंतर्गत जमुनिया नदी के अस्तित्व का नाम-ओ-निशान मिटाने का संकल्प ले लिया है। कोयला तस्कर जमुनिया नदी के एक बड़े भाग पर कब्जा कर जमुनिया नदी के बीच से और किनारे किनारे से अवैध तरीके से कोयले की भारी मात्रा में कटाई कर रहे हैं।
वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि किस प्रकार मजदूर नदी में सुरंग बनाकर सुरंग से कोयला निकालकर बाहर भंडारण कर रहे हैं। ऐसे एक नहीं बल्कि कई दर्जन अवैध मुहाने और सुरंग नदी के बीच में और किनारे किनारे बने हुए हैं। जिससे हर रोज अवैध तरीके से सैकड़ो टन कोयला निकाला जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इन मुहानों के भीतर सैकड़ो की संख्या में स्थानीय और बाहरी मजदूर अवैध तरीके से दिन रात कोयला की कटाई करते रहते हैं। हर रोज लगभग 20 से 25 ट्रक अवैध कोयला जमुनिया नदी की कोख से निकाला जाता है और बाहर की मंडियों में ऊंचे कीमतों पर बेचा जाता है।


बाघमारा थाना अंतर्गत ही राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय केशरगढ़ बस्ती के समीप हनुमान मंदिर के सामने बड़े पैमाने पर अवैध कोयला डिपो चलाया जा रहा है। इस डिपो मे ट्रैक्टर से अवैध कोयला गिराया जाता है और फिर मिनी हाइवा से परिवहन किया जाता है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार हर दिन 15 से 20 मिनी हाइवा में कोयला निकाला जाता है।

कोयला तस्करी में अमरेंद्र, प्रभास, दिलीप, उत्तम, उदय, सुधीर, श्रीकांत और मुन्ना का नाम आ रहा है सामने
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जमुनिया नदी में कोयला तस्करी कर रहे कोयला तस्करों के नाम क्रमशः उत्तम, उदय, सुधीर, श्रीकांत, मुन्ना, प्रभास, अमरेंद्र एवं दिलीप है। इन कोयला तस्करों ने आपसी मिलीभगत एवं प्रशासन के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों से साथ साठ गांठ कर अपने-अपने स्पॉट चिन्हित कर लिए हैं, जिससे हर रोज भारी मात्रा में कोयला निकाल रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अमरेंद्र, दिलीप और प्रभास यह कोयला तस्करी में बड़े नाम है जिन्हें खाकी वर्दी के साथ-साथ कुछ खादी का भी संरक्षण मिला हुआ है। लोगों का कहना है कि अगर ठीक से जांच पड़ताल और कार्रवाई किया जाए तो कुछ और चौंकाने वाले कोयला तस्करों के नाम भी सामने आ सकते हैं।


बाघमारा पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल, क्या पुलिस फिर कर रही है केशरगढ़ा जैसी घटना का इंतजार
जिस प्रकार जमुनिया नदी को खोखला कर हर रोज सैकड़ो टन कोयले की तस्करी की जा रही है और बाघमारा पुलिस इस लूट से पूरी तरह बेखबर है। उससे बाघमारा पुलिस के कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। आखिर बाघमारा पुलिस के नाक के नीचे इतने बड़े पैमाने पर खुलेआम कोयला खनन कैसे हो रहा है? इस अवैध खनन से न केवल नदी के अस्तित्व पर संकट आ गया है बल्कि नदी का सीना चीरकर अवैध रूप से खनन कर रहे मजदूरों की जान पर भी बनी रहती है। यदि समय रहते प्रशासन ने इस अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए उचित कदम नहीं उठाया तो इसमें कोई शक नहीं कि केशरगढ़ा चाल हादसा जैसी घटना दोबारा देखने सुनने को मिल जाए।

सदन में दहाड़ने वाले सांसद, विधायक कोयले की लूट पर खामोश क्यों?
सदन में दहाड़ने वाले सांसद और विधायक जमुनिया नदी में हो रहे इस अवैध खनन पर अब तक पूरी तरह से मौन धारण क्यों किए हुए है यह समझ से परे है। लोगों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि अवैध कोयला खनन, भंडारण और परिवहन पर रोक लगाने की खातिर सड़क पर उतरकर विरोध करें तो निश्चित तौर पर अवैध कोयला कारोबार पर रोक लगाया जा सकता है। देखना है कि क्या सांसद विधायक एवं उसके प्रतिनिधि जमुनिया नदी में हो रहे इस अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए आगे आते हैं या नहीं।

जमुनिया नदी का अस्तित्व संकट में, लोगों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन एवं झारखंड सरकार से लगाई गुहार
जमुनिया नदी में हो रहे अवैध खनन से न केवल करोड़ के राष्ट्र संपत्ति की लूट हो रही है बल्कि जमुनिया नदी का अस्तित्व भी खत्म होने के कगार पर है। कोयला माफियाओं और कोयला तस्करों ने कोयला निकालने की खातिर नदी में सैकड़ो अवैध मुहाने और सुरंगे खुद डाली है। क्षेत्र के लोगों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन एवं झारखंड सरकार से जमुनिया नदी में हो रहे अवैध खनन पर रोक लगाकर जमुनिया नदी को बचाने की गुहार लगाई है। अब देखना है कि क्या जमुनिया नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए और जमुनिया नदी में हो रहे अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है या फिर जमुनिया नदी को बर्बाद कर ऐसे ही कोयला खनन जारी रहेगा।
