
कतरास/धनबाद : राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) द्वारा रांची और धनबाद में टैक्स संग्रहण का काम कर रही निजी एजेंसियों मेसर्स श्री पब्लिकेशन एंड स्टेशनर्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ करार (एग्रीमेंट) तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। सूडा निदेशक सूरज कुमार के आधिकारिक आदेश के तहत रांची और धनबाद नगर निगम समेत राज्य के सभी नगर निकायों में पुरानी आउटसोर्सिंग एजेंसियों का काम समाप्त कर दिया गया है। लेकिन आम नागरिकों के लिए राहत की बात यह है कि राज्यवासी अब सूडा के आधिकारिक वेब पोर्टल (suda.jharkhand.gov.in) के माध्यम से सीधे अपना टैक्स और यूजर चार्ज जमा कर सकते हैं। पोर्टल के जरिए नागरिक घर बैठे ही प्रॉपर्टी टैक्स (होल्डिंग टैक्स), वाटर यूजर चार्ज और ट्रेड लाइसेंस फीस का ऑनलाइन भुगतान कर सकेंगे। विभागीय अधिकारियों के अनुसार ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था को सुचारू रूप से चालू रखा गया है ताकि आम लोगों को टैक्स जमा करने के लिए नगर निकायों के दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
2,200 कर्मचारियों के रोजगार पर संकट
गौरतलब है कि पूर्व में टैक्स संग्रहण का जिम्मा संभाल रही मेसर्स श्री पब्लिकेशन एंड स्टेशनर्स प्राइवेट लिमिटेड का इकरारनामा अवधि दिनांक 02.10.2023 एवं 09.12.2023 को समाप्त हो जाने के पश्चात कार्यालय आदेश संख्या- 43 दिनांक 04.10.2023 द्वारा उन्हें राजस्व संग्रहण करने हेतु अवधि विस्तार दिया गया था जिसे अब तत्काल को प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। हालांकि बिना किसी नई एजेंसी के चयन के ही टैक्स कलेक्टरों एवं अन्य कर्मियों को काम से हटा दिया गया, जिससे करीब 2,200 कर्मचारियों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है। साथ ही डोर-टू-डोर टैक्स वसूली बंद होने से निकायों की आर्थिक स्थिति बिगड़ने और वार्षिक लक्ष्य पूरा न होने पर 15वें वित्त आयोग से मिलने वाले फंड के प्रभावित होने की भी आशंका जताई जा रही है।
हटाए गए कतरास अंचल के टैक्स कलेक्टर इरफान खान, सुदीप कुमार तिवारी, मो सगीर आलम एवं हीरालाल कुम्हार
हालांकि, सूडा पोर्टल के जरिए सीधे ऑनलाइन भुगतान की सुविधा शुरू रहने से डिजिटल माध्यम का उपयोग करने वाले करदाताओं को बड़ी सहूलियत मिलेगी। वहीं विभाग के तरफ से स्पष्ट किया गया कि कतरास अंचल के टैक्स कलेक्टर इरफान खान, सुदीप कुमार तिवारी, मो सगीर आलम एवं हीरालाल कुम्हार की सेवा को भी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। विभाग ने आम जनता को टैक्स देने सावधानी बरतने तथा ऑनलाइन पोर्टल के जरिए टैक्स देने की अपील की है। वहीं अब टैक्स कलेक्टरों के न होने से निगम के राजस्व अधिकारियों(रेवेन्यू इंस्पेक्टर) पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
