
नगर निगम और बाघमारा अंचल की सुस्ती से अतिक्रमणकारियों का बढ़ा मनोबल
कतरास: यूं तो कतरास हटिया की सरकारी जमीन पर पहले से ही अतिक्रमण बैठा हुआ है जिसके कारण राज्य सरकार और नगर निगम धनबाद को बकर हट्टा के लिए पर्याप्त जमीन नहीं मिल रहा है। वहीं दूसरी और एक बार फिर से वार्ड संख्या 01 अंतर्गत कतरास हटिया के काली मंदिर और शिव मंदिर के बीच सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने की तैयारी चल रही है। जमीन अतिक्रमण करने के लिए बांस बल्ली भी गिराया जा चुका है। बता दें कि जब भी कोई जमीन अतिक्रमण किया जाता है तो सबसे पहले बांस बल्ली से जमीन की घेराबंदी की जाती है फिर उसे पर चारों ओर से तिरपाल चढ़ाया जाता है फिर कुछ दिन के बाद त्रिपाल के अंदर धीरे-धीरे हिट सीमेंट की पक्की दीवार खड़ी कर दी जाती है और इस तरह से जमीन कब्जा कर लिया जाता है।
एक अन्य कब्जाधारी के द्वारा हटिया में दो लोहे का पोल भी गाड़ दिया गया है। सूचना है कि उसके द्वारा अतिक्रमण किए गए जमीन को और भी ज्यादा बढ़ाने की तैयारी चल रही है।

एस पाण्डेय कराता है सरकारी जमीन कब्जा, बदले में लेता है मोटी रकम
मिली जानकारी के अनुसार जिस जगह पर जमीन कब्जा करने की तैयारी की जा रही है, उसके नीचे नाली का पाइप बिछा हुआ है। ऐसे में स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन कब्जाधारी के खिलाफ फिलहाल किसी को बोलने या विरोध करने की हिम्मत नहीं दिख रही है। मिली जानकारी के अनुसार कतरास के ही किसी एस पांडेय के द्वारा कतरास हटिया की सरकारी जमीन पर अतिक्रमणकारियों द्वारा कब्जा करवाया जाता है। इसके बदले में एस पांडे को अतिक्रमणकारियों से मोटी रकम मिलती है। सूचना है कि उस मोटी रकम में से कुछ रकम कतरास के एक प्रतिष्ठित घराना को जाता है और कुछ रकम नगर निगम एवं बाघमारा अंचल के भ्रष्ट अधिकारियों को भी पहुंचाया जाता है। जिसके कारण अतिक्रमणकारियों को सरकारी जमीन अतिक्रमण कर कब्जा करने से नहीं रोका जाता है। लोग बताते है कि उसका खुद का घर भी सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाया गया है

एक महीना पहले नगर निगम के अधिकारियों ने लिया था कतरास हटिया का जायजा, अवैध कब्जा हटाने की बात कही थी
बता दे कि लगभग 1 महीना पहले नगर आयुक्त, सहायक नगर आयुक्त एवं नगर निगम के कुछ अन्य अधिकारियों ने कतरास हटिया का मुआयना किया था। चारों तरफ अवैध कब्जा देखकर अवैध कब्जा और अतिक्रमण हटाने की बात की थी। उसके बाद फिर यह ठंडे बस्ते में चला गया। जिसके कारण अवैध कब्जाधारियों में मनोबल बढ़ गया और फिर से अतिक्रमण की तैयारी होने लगी है।
